चंडीगढ़। गुड़गांव में निर्माण कार्यों पर अब विशेष टीम नजर रखेगी। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस टीम को गठित करने के निर्देश हरियाणा सरकार और स्थानीय प्रशासन को जारी किए हैं।
सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान कार्यवाहक चीफ जस्टिस जसबीर सिंह पर आधारित खंडपीठ ने कहा कि यह टीम सभी इलाकों पर गश्त करे और चेक करें कि निर्माण कार्यों के लिए किस पानी को उपयोग में लाया जा रहा है। खंडपीठ ने कहा कि अगर कोई बिल्डर निर्माण में ग्राउंड वाटर को इस्तेमाल में ला रहा है, तो तत्काल निर्माण कार्य को रोक दिया जाए और बिल्डर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाए। साथ ही, हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश जारी किए हैं कि अगली सुनवाई के दौरान गुड़गांव में कुल वोरबेलों की संख्या, हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद पानी की आपूर्ति में फर्क और समस्या के निपटारे के लिए फ्यूचर प्लान का मसौदा हाईकोर्ट में पेश किया जाए। खंडपीठ ने मामले की आगामी सुनवाई 21 अगस्त के लिए निर्धारित की है।
मामले की सुनवाई के दौरान याची के वकील ने कहा कि हाईकोर्ट के निर्देशों के बावजूद गुड़गांव में निर्माण कार्य जारी है और कुछ बिल्डर खुलेआम ग्राउंडवाटर का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने स्थानीय प्रशासन पर आरोप जड़ा कि प्रशासन सब कुछ देखते हुए भी मौन बना हुआ है। इस पर हरियाणा सरकार द्वारा हाईकोर्ट को बताया गया कि कोर्ट के निर्देशों के बाद से प्रशासन पूरा चैक रखे हुए है ।
और कुछ के खिलाफ कार्रवाई भी की है।
इस पर खंडपीठ ने पूछा कि कार्रवाई कितनों पर की है और कौन लोग हैं। इस पर सरकारी वकील कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए। खंडपीठ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल इस पर चैक रखने के लिए कमेटी गठित करने के निर्देश जारी कर दिए। खंडपीठ ने निर्देश दिया कि सरकार द्वारा गठित कमेटी साइटों का दौरा करेगी और प्रोपर चेक रखेगी।
यह है मामला
गुड़गांव निवासी सुनील सिंह ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा है कि गुड़गांव में हो रहे निर्माण कार्यों में ग्राउंडवाटर का इस्तेमाल हो रहा है। इससे भू-जल का स्तर दिनोंदिन गिरता जा रहा है। याचिका में केंद्रीय पर्यावरण विभाग को भी प्रतिवादी बनाया है। हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान भूजल के इस्तेमाल से किए जा रहे निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी थी और इस संबंध में निर्देश दिया था। Source>>>
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