नई दिल्ली: तुगलकाबाद और आसपास के इलाकों में सरकार की सौ बीघा से अधिक जमीन पर कब्जा करने व बेच देने के बड़े घोटाले में एफआइआर दर्ज होने से दागी अधिकारियों, नेताओं व अन्य आरोपियों की नींद उड़ी हुई है। कारगुजारी की पोल खुलने के बाद सरकारी अफसरों को नौकरी गंवाकर जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है। फर्जीवाड़े में 42 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद बृहस्पतिवार को दिनभर सरकारी महकमे, नेताओं, बिल्डर, भूमाफिया व घोटाले से जुड़े स्थानीय लोगों में हड़कंप मचा रहा। दैनिक जागरण ने बुधवार के अंक में यह खबर प्रमुखता से प्रकाशित कर 42 आरोपियों के नाम उजागर किए थे। बृहस्पतिवार को हालत यह रही कि डीडीए व दिल्ली नगर निगम के सेंट्रल जोन के जिन आठ अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया, उनमें अधिकांश दिन भर मीडिया के सवालों से बचने के लिए दफ्तरों से गायब रहे। मामले में पुलिस अधिकारी का कहना है कि थाना पुलिस घोटाले से संबंधित सबूत जुटाने में जुट गई। इसके बाद आरोपियों की गिरफ्तारी हो सकती है। बताया जा रहा है कि दक्षिण पूर्वी जिला के पूर्व एडिशनल कमिश्नर वीरेंद्र चहल व वर्तमान एडिशनल पुलिस कमिश्नर अजय चौधरी ने तीन बार डीडीए के वाइस चेयरमैन को पत्र भेजकर शिकायत की थी कि सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा किया जा रहा है और इन्हें बेचा भी जा रहा है। बावजूद इसके उनकी शिकायतों पर कभी ध्यान नहीं दिया गया। यहां तक कि दिल्ली पुलिस ने उन तमाम प्रॉपर्टी के बारे में विस्तृत कलंदरा तैयार कर उसे भी क्षेत्रीय एसडीएम के पास कार्रवाई के लिए भेज दिया था, किंतु उस पर भी कार्रवाई नहीं हुई। दिल्ली पुलिस समय-समय पर लिखित में इलाके में हो रहे अवैध निर्माण की सूचना सेंट्रल जोन के अधिकारियों को देती रही, किंतु कभी भी कार्रवाई नहीं की गई। क्षेत्रीय एसडीएम को अवैध निर्माण मामले की देखरेख के लिए स्पेशल टास्क फोर्स का चेयरमैन बना दिया गया है। उन्होंने इलाके में सरकारी जमीन पर कब्जा होते देख काम रोको आदेश पारित किया था, जिसकी एक प्रति निगम के संबंधित अधिकारियों को भेजी गई थी। परंतु प्रशासन, राजनेता, बिल्डर व भूमाफिया गठजोड़ के कारण आज तक इस पर कार्रवाई नहीं की गई। हद तो तब हो गई जब दो बार अवैध संपत्ति पर कार्रवाई के लिए बड़े पैमाने पर विस्तृत योजना बनाकर तारीख भी तय हो गई। किंतु तब भी हुआ कुछ नहीं। अब इस घोटाले की परत दर परत खुलनी शुरू हो गई है। ज्ञात रहे पुल प्रह्लादपुर, तुगलकाबाद, विश्वकर्मा कॉलोनी, संगम विहार व आसपास की कॉलोनियों में वर्षो से खेती की जमीन, डीडीए, ग्रामसभा, भारतीय पुरातत्व विभाग, जंगल, रिज एरिया आदि की करीब सौ बीघा जमीन पर डीडीए, एमसीडी सेंट्रल जोन के अधिकारी, इलाके के कई नेता, निगम पार्षद, बिल्डर, भूमाफिया व स्थानीय लोगों की मिलीभगत से कब्जा कर लिया गया या बेच दी गई। किशन गोपाल गुप्ता द्वारा मामला अदालत में लाए जाने पर अदालत के निर्देश पर 26 दिसंबर को डीडीए के एक व निगम के सात अधिकारियों समेत स्थानीय नेता, बिल्डर, भू माफिया व स्थानीय लोगों के खिलाफ आइपीसी की कई धाराओं समेत अन्य कानूनों के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। Source>>>
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