लखनऊ। प्रदेश में बुनियादी सुविधाओं को बढ़ाने के इरादे से एक्सप्रेस-वे प्रोजेक्ट को बढ़ावा देने की नीति के तहत नई सरकार ने भी गंगा एक्सप्रेस-वे प्रोजेक्ट में दिलचस्पी दिखाई है। नोएडा से बलिया तक बनने वाले आठ लेन एक्सप्रेस वे की पिछली सरकार की महात्वाकांक्षी परियोजना को केंद्र सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से पर्यावरणीय अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) अभी तक नहीं मिल पाई है। माना जा रहा है कि नई सरकार के केंद्र से अपेक्षाकृत बेहतर तालमेल की वजह से एनओसी मिलने में ज्यादा दिक्कत नहीं आएगी।
नई सरकार में नए औद्योगिक विकास आयुक्त अनिल कुमार गुप्ता ने शुक्रवार को गंगा एक्सप्रेस वे प्रोजेक्ट की समीक्षा की। गुप्ता ने इस परियोजना की अब तक की प्रगति पर पूरी जानकारी हासिल की। असल में इस प्रोजेक्ट के लिए नियमानुसार एनओसी डेवलपर के बजाए प्रोजेक्ट की नोडल संस्था उप्र एक्सप्रेस वे औद्यागिक विकास प्राधिकरण यानी यूपीडा को लेनी है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने पिछले साल अपने नियमों में बदलाव करते हुए एनओसी लेने का जिम्मा डेवलपर के बजाए प्रदेश सरकार पर डाल दिया था। अब औद्योगिक विकास आयुक्त ने अफसरों से कहा है कि वे इस एनओसी के लिए विधिवत आवेदन पयार्वरण मंत्रालय को जरूर भेज दें।
केंद्र सरकार से इस पर एनओसी मिलने के बाद डेवलपर प्रदेश सरकार से नए सिरे से समझौता करेगा और प्रोजेक्ट के लिए बैंक गारंटी जमा करेगा। यूपीडा अगले हफ्ते एनओसी के लिए विधिवत आवेदन पर्यावरण मंत्रालय को भेजेगा।
गौरतलब है कि एनओसी के न मिलने के कारण ही विधानसभा चुनाव से पहले डेवलपर ने इस प्रोजेक्ट के लिए जमा की गई 894.75 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी तत्कालीन मायावती सरकार से वापस ले ली थी। अगर एनओसी मिल जाती है तो डेवलपर बैंक गारंटी फिर सरकार को जमा कर देगा और रुका हुआ प्रोजेक्ट आगे बढ़ सकता हैै।
एक्सप्रेस वे के मार्ग में तीन किमी पर फतेहगढ़, 12 किमी पर मिर्जापुर तथा 80 किमी पर लखनऊ जुड़ेंगे
हरी झंडी मिलने के बाद ही हो सकेगा जमीन अधिग्रहण
यूपीडा व औद्योगिक विकास विभाग के मुताबिक, केंद्र से जब पर्यावरणीय क्लीयरेंस मिलेगी तो इसे इलाहबाद हाईकोर्ट को बताया जाएगा। इसके बाद हरी झंडी मिलेगी तब जमीन अधिग्रहण शुरू होगा। Source>>>
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