रोहिणी आवासीय स्कीम-1981
नई दिल्ली। 31 साल बाद डीडीए की रोहिणी आवासीय स्कीम-1981 का ड्रा तो मंगलवार को हो गया। लेकिन इस स्कीम के आवंटियों का इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार को हुए ड्रा के आवंटियों की तो छोड़िए बिजली, पानी, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं न होने से वर्ष 2003 के आवंटी तक भी मकान बनाने की हालत में नहीं हैं। इनसे संबंधित सेक्टरों तक पहुंचना भी लोगों के लिए आसान नहीं है।
दरअसल, स्कीम के तहत डीडीए ने 1982-2007 के बीच 14 बार ड्रा निकाला। इसमें 2002 तक आवंटित प्लॉट तक बुनियादी सुविधाएं मुहैया करा दी गईं। इससे संबंधित सेक्टर आबाद भी हो गए। इसके बाद 2003-07 के बीच डीडीए ने चार ड्रा में करीब 13,000 प्लॉट आवंटित किए। इससे आवंटियों में उम्मीद जगी, लेकिन डीडीए की लेटलतीफी से उम्मीद इंतजार मे बदल गई। एक आवंटी ने बताया कि सेक्टर-28 प्लॉट मिला था। सोचा था कि राजधानी में जल्द अपना मकान होगा। इससे किराएदारी से फुर्सत मिल जाएगी। लेकिन डीडीए की चाल इतनी सुस्त है कि करीब आठ साल बाद भी अपने प्लॉट तक नहीं पहुंच सकता। इस बारे में डीडीए के एक अधिकारी ने बताया कि संबंधित एजेंसिया का काम चल रहा है।
आवंटियों की दिक्कत जल्द ही दूर हो जाएगी।
2010 के आवंटियों पर दोहरी मार
वर्ष 2010 डीडीए हाउसिंग स्कीम के आवंटियों पर दोहरी मार पड़ रही है। ज्यादातर आवंटियों ने बैंक लोन से डीडीए को पूरी कीमत तो अदा की, लेकिन बिजली, पानी, सड़क जैसी सुविधाएं न मिलने से रहना संभव नहीं है। अब जहां उन्हें बैंक किस्त अदा करनी पड़ रही है। वहीं, मकान के किराए का भी भुगतान करना पड़ रहा है। फिलहाल, डीडीए अधिकारी 6 माह के इंतजार का भरोसा दिला रहे हैं।
रोहिणी आवासीय स्कीम-1981
1982-2007 के बीच अलॉट किए गए 55,169 प्लॉट
1982-2002 के आवंटियों से आबाद हुआ सेक्टर 3-24, बुनियादी सुविधाएं मौजूद
2003-07 के बीच का आवंटन हुआ सेक्टर 28, 29, 30, 32 में, बुनियादी सुविधाएं मौजूद
मंगलवार के हुए आवंटन से आबाद होगे सेक्टर-28-37
आबाद होने के पहले सजी प्रापर्टी डीलर की दुकानें
नई दिल्ली। रोहिणी के नए सेक्टरों में बेशक आवंटित प्लॉट की पहचान मुश्किल हो, सड़क टूटी हो, पानी न मिले, शाम होते ही अंधेरा पसर जाए। लेकिन आपको यहां कदम-कदम पर प्रापर्टी डीलरों की दुकानें सजी दिख जाएंगी। इनसे बस आप प्लॉट की मांग कीजिए, आपको सेक्टर-28 से 37 के बीच कहीं भी प्लॉट दिलाने का भरोसा मिल जाएगा। यही नहीं, आनन फानन में आपसे औपचारिकताएं पूरा कराने की कोशिश भी की जाएगी। साथ ही, यह डर भी दिखाया जाएगा कि जल्दी कीजिए, बाद में मिलने की कोई गारंटी नहीं। आपने अग्रिम भुगतान किया नहीं कि सारी सरदर्दी आपकी होगी। फिर प्रापर्टी डीलर आपको तारीख-पर-तारीख देता रहेगा। नियम के अनुसार, यहां की रजिस्ट्री संभव नहीं है। हाईकोर्ट में मामले की पीआईएल दायर करने वाले राहुल गुप्ता ने बताया कि डीडीए का नियम है कि फ्री होल्ड होने से पहले प्लॉट की नई रजिस्ट्री नहीं हो सकती। इसके लिए जरूरी है कि प्रापर्टी पर मकान बना हो। मकान के लिए एमसीडी से नक्शा पास कराना होगा। यह तभी पास होगा जब मौके पर बुनियादी सुविधाएं होंगी। अब सोचिए कि अगर हम प्लॉट की पहचान नहीं कर पा रहे तो फ्री होल्ड के बारे में सोचना भी बेकार है। Source>>>
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